अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते | anahutah pravishati aprishto bahu bhashate
मूर्ख और दुष्ट प्रकृति के व्यक्ति पर श्लोक अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते | अविश्वस्ते विश्वसति मूढचेता नराधमः || –
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मूर्ख और दुष्ट प्रकृति के व्यक्ति पर श्लोक अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते | अविश्वस्ते विश्वसति मूढचेता नराधमः || –
Read Moreदुःखी व्यक्ति पर श्लोक ईर्ष्यी घृणि न संतुष्टः क्रोधिनो नित्यशङ्कितः | परभाग्योपजीवी च षडेते नित्य दुःखिता || – विदुर नीति
Read Moreक्षमा करने की परम शक्ति पर श्लोक सोSस्य दोषो न मन्तव्यः क्षमा हि परमं बलं | क्षमा गुणो अशक्तानां शक्तानां
Read Moreदुर्गुणों के त्याग पर श्लोक त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः | कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत् त्रयं त्यजेत् || – विदुर नीति भावार्थ
Read Moreसुख पर श्लोक अर्थागमो नित्यमरोगिता च प्रिया च भार्या प्रियवादिनी च | वश्यस्य पुत्रोsर्थकरी च विद्या षड् जीवलोकस्य सुखानि राजन्
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