Author: Shivesh Pratap

संस्कृत श्लोक का संग्रह हिंदी अर्थ सहित | Collection of Sanskrit Shlokas on Various Topics

अमित्रं कुरुते मित्रं मित्रं द्वेष्टि हिनस्ति च | amitram kurute mitram mitram dveshti hinasti cha

मूर्खों की मित्रता के लक्षण पर श्लोक अमित्रं कुरुते मित्रं मित्रं द्वेष्टि हिनस्ति च | कर्म चारभते दुष्टं तमाहुर्मूढचेतसम् ||

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संस्कृत श्लोक का संग्रह हिंदी अर्थ सहित | Collection of Sanskrit Shlokas on Various Topics

अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते | anahutah pravishati aprishto bahu bhashate

मूर्ख और दुष्ट प्रकृति के व्यक्ति पर श्लोक अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते | अविश्वस्ते विश्वसति मूढचेता नराधमः || –

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संस्कृत श्लोक का संग्रह हिंदी अर्थ सहित | Collection of Sanskrit Shlokas on Various Topics

ईर्ष्यी घृणि न संतुष्टः क्रोधिनो नित्यशङ्कितः | irshyi ghrini na santushtah krodhino nityashankitah

दुःखी व्यक्ति पर श्लोक ईर्ष्यी घृणि न संतुष्टः क्रोधिनो नित्यशङ्कितः | परभाग्योपजीवी च षडेते नित्य दुःखिता || – विदुर नीति

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सोSस्य दोषो न मन्तव्यः क्षमा हि परमं बलं | soSsya dosho na mantavyah kshama hi paramam balam

क्षमा करने की परम शक्ति पर श्लोक सोSस्य दोषो न मन्तव्यः क्षमा हि परमं बलं | क्षमा गुणो अशक्तानां शक्तानां

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संस्कृत श्लोक सुभाषित संग्रह हिंदी अंग्रेजी अर्थ सहित | Collection of Sanskrit Shloka with Meaning

त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः | trividham narakasyedam dvaram nashanamatmanah

दुर्गुणों के त्याग पर श्लोक त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः | कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत् त्रयं त्यजेत् || – विदुर नीति भावार्थ

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