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स्त्री का अपमान पुण्यकर्मों को नष्ट कर देता है
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स्त्री का अपमान पुण्यकर्मों को नष्ट कर देता है

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स्त्री का अपमान पुन्यकर्मों को नष्ट कर देता है |

महाभारत युद्ध के बाद भीष्म पितामह ने श्री कृष्ण भगवान से पूछा कि मधुसूदन मेरे कौन से कर्म का फल है़ जो शरशैया पर पड़ा हुआ हूँ । यह बात सुनकर मधुसूदन मुस्कुराए और भीष्म पितामह से पूछा आपको पूर्व जन्मों का ज्ञान है। इस पर पितामह ने सौ पूर्व जन्मो का ज्ञान बताया और कहा मैंने कभी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाया भगवान ने याद दिलाया कि आप युवराज थे तब एक वार आपने अपने बाण से एक करकैटा जीव को उठाकर फेंक दिया था। वह बेरी के झाड पर अठारह दिन जीवित रहकर कांटो की चुभन झेलता रहा और भगवान से यही प्रार्थना करता रहा कि हे युवराज जिस तरह से मैं तड़प-तड़प कर मृत्यु को प्राप्त हो रहा हूँ, ठीक इसी प्रकार तुम भी होना।

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       हे पितामह !!! आपके पुण्य कर्मो की वजह से आज तक तुम पर करकैंटा का श्राप लागू नहीं हो पाया लेकिन हस्तिनापुर की राजसभा में द्रोपदी का चीर हरण होता रहा और आप देखते रहे। आप सक्षम थे उस अबला पर अत्याचार रोकने में लेकिन आपने दुर्योधन-दु:शासन को नहीं रोका इसी कारण पितामह आपके सारे पुण्यकर्म क्षीण हो गए और करकैंटा का श्राप आप पर लागू हाे गया । अत: पितामह प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मो का फल कभी न कभी तो भोगना ही पडेगा प्रकृति सर्वोपरि है । इसका न्याय सर्वोपरि और प्रिय है इसलिए प्रथ्वी पर निवास करने वाले प्रत्येक प्राणी व जीव-जन्तु केा भी भोगना पड़ता है और कर्मो के अनुसार जन्म होता है।

यदि भारतीय समाज का सिंहावलोकन करें तो हम पाते हैं की जैसे जैसे स्त्री का सम्मान समाज में कम हुआ उसी के साथ इस भारत का पराक्रम भी ख़त्म हो गया |भारतीय संस्कृति की अधोगति और पतन भी स्त्री के अपमान से प्रारंभ हुआ | जिस संस्कृति ने स्त्री को घर में देवी के रूप में प्रतिस्थापित किया और लक्ष्मी कह कर संबोधित किया उसी समाज में जब स्त्री को भोग और अत्याचार के लिए विकल्प बना दिया तो उस समाज का पतन निश्चित और अवस्यम्भावी था|

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Shivesh Pratap

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3 thoughts on “स्त्री का अपमान पुण्यकर्मों को नष्ट कर देता है

  • Ujala

    Great review

  • मधु निगम

    आप प्रभावी लेखक हैं ।

  • swati majumdar

    Thanks for this article….

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