जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के अनमोल विचार | George Bernard Shaw Quotes in Hindi
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के अनमोल विचार
George Bernard Shaw Quotes in Hindi
जार्ज बर्नार्ड शा जीवनी Biography of George Bernard Shaw:
नाम: जार्ज बर्नार्ड शा (George Bernard Shaw)
जन्म: जार्ज बर्नार्ड शा का जन्म डबलिन मे 26 जुलाई 1856 को हुआ था।
पिता का नाम: जार्ज कारर शा
राष्ट्रीयता: Irish
कार्यक्षेत्र: नाटककार, Playwright, critic, political activist
मृत्यु: 2 नवम्बर, 1950, Ayot St Lawrence, United Kingdom
उपलब्धियाँ: नोबेल पुरस्कार विजेता
- Nobel Prize in Literature 1925
- Academy Award for Writing Adapted Screenplay 1938 Pygmalion
- co-founder of the London School of Economics, New York Drama Critics’ Circle Special Citation
जॉर्ज बर्नार्ड शा के इंस्पायरिंग थॉट्स:
“ज्यादातर लोग पूजा नहीं करते, वे भीख मांगते हैं।”
“एक सज्जन व्यक्ति वह है जो दुनिए से जितना लेता है उससे अधिक देता है|”
इंग्लैंड और अमेरिका एक ही भाषा द्वारा विभाजित दो देश है।
कमाए बगैर धन का उपभोग करने की तरह ही खुशी दिए बगैर खुश रहने का अधिकार हमें नहीं है।
जानवर मेरे दोस्त हैं… और मैं अपने दोस्तों को नहीं खाता|
आप अपने भविष्य को नहीं बदल सकते लेकिन आप अपनी आदतों को बदल सकते है तथा सुनिश्चित मानें आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी।
जो अपना दिमाग नहीं बदल सकते वे कुछ भी नहीं बदल सकते|
जो लोग कहते हैं कि इसे नहीं किया जा सकता उन्हें उन लोगों को नहीं टोकना चाहिए जो कर रहे हैं|
आप अपना चेहरा देखने के लिए आइना प्रयोग करते हैं ; आप अपनी आत्मा देखने के लिए कलाकृतियाँ देखते हैं|
अपने साथी प्राणियों के प्रति सबसे बड़ा पाप उनसे घृणा करना नही बल्कि उनसे कोई मतलब ना रखना है ; यही निर्दयता का सार है|
जिस आदमी के दांत में दर्द होता है, वो सोचता है कि हर कोई जिसके दांत सही हैं, खुश है। गरीबी से त्रस्त व्यक्ति अमीरों के बारे में यही गलती करता है।
वृद्ध लोग खतरनाक होते हैं, उन्हें इससे कोई मतलब नहीं रहता कि दुनिया का क्या होने जा रहा है।
मैंने कभी किसी शेरों को काबू करने वाले व्यक्ति के साहस के बारे में अधिक नहीं सोचा। पिंजरे के अन्दर वो कम से कम लोगों से सुरक्षित रहता है।
गलतियाँ करते हुए बीताया गया जीवन बिना कुछ किये बीताये गए जीवन की तुलना में न सिर्फ अधिक सम्मानजनक है बल्कि अधिक उपयोगी भी है|
आदमी सबसे उँची चोटी पर चढ़ सकता है, लेकिन वो यहां अधिक देर तक रह नहीं सकता।
संभावनाएं कई हैं जब हम एक बार प्रतिक्रिया नहीं क्रिया करना का निश्चय कर लें।
जब कोई आदमी कहता है कि पैसा कुछ भी कर सकता है, तो साफ़ हो जाता है। उसके पास बिलकुल नहीं है।
सत्य को कह देना ही मेरा मज़ाक करने का तरीका है। संसार में यह सब से विचित्र मज़ाक है।
आमतौर पर आदमी उन चीजों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहता है जिनका उससे कोई लेना देना नहीं होता।
पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है, संपूर्ण रूप से त्रुटिहीन पुस्तक कभी पढ़ने लायक़ नहीं होती।
शिक्षा और प्रशिक्षण का एकमात्र उद्देश्य समस्या-समाधान होना चाहिये।
संसार मे समस्या यह है कि मूढ लोग अत्यन्त सन्देहरहित होते है और बुद्धिमान सन्देह से परिपूर्ण।
आप को अच्छा करने का अधिकार बुरा करने के अधिकार के बिना नहीं मिल सकता, माता का दूध शूरवीरों का ही नहीं, वधिकों का भी पोषण करता है।
जो अपना दिमाग नहीं बदल सकते वे कुछ भी नहीं बदल सकते|
जो लोग कहते हैं कि इसे नहीं किया जा सकता उन्हें उन लोगों को नहीं टोकना चाहिए जो कर रहे हैं|
आप अपना चेहरा देखने के लिए आइना प्रयोग करते हैं; आप अपनी आत्मा देखने के लिए कलाकृतियाँ देखते हैं|
अपने साथी प्राणियों के प्रति सबसे बड़ा पाप उनसे घृणा करना नही बल्कि उनसे कोई मतलब ना रखना है ; यही निर्दयता का सार है|
जिस आदमी के दांत में दर्द होता है, वो सोचता है कि हर कोई जिसके दांत सही हैं, खुश है। गरीबी से त्रस्त व्यक्ति अमीरों के बारे में यही गलती करता है।
वृद्ध लोग खतरनाक होते हैं, उन्हें इससे कोई मतलब नहीं रहता कि दुनिया का क्या होने जा रहा है।
मैंने कभी किसी शेरों को काबू करने वाले व्यक्ति के साहस के बारे में अधिक नहीं सोचा। पिंजरे के अन्दर वो कम से कम लोगों से सुरक्षित रहता है।
आदमी सबसे उँची चोटी पर चढ़ सकता है, लेकिन वो यहां अधिक देर तक रह नहीं सकता।
संभावनाएं कई हैं जब हम एक बार प्रतिक्रिया नहीं क्रिया करना का निश्चय कर लें।
जब कोई आदमी कहता है कि पैसा कुछ भी कर सकता है, तो साफ़ हो जाता है। उसके पास बिलकुल नहीं है।
सत्य को कह देना ही मेरा मज़ाक करने का तरीका है। संसार में यह सब से विचित्र मज़ाक है।
आमतौर पर आदमी उन चीजों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहता है जिनका उससे कोई लेना देना नहीं होता।
पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है, संपूर्ण रूप से त्रुटिहीन पुस्तक कभी पढ़ने लायक़ नहीं होती।
शिक्षा और प्रशिक्षण का एकमात्र उद्देश्य समस्या-समाधान होना चाहिये।
संसार मे समस्या यह है कि मूढ लोग अत्यन्त सन्देहरहित होते है और बुद्धिमान सन्देह से परिपूर्ण।
आप को अच्छा करने का अधिकार बुरा करने के अधिकार के बिना नहीं मिल सकता, माता का दूध शूरवीरों का ही नहीं, वधिकों का भी पोषण करता है।
आज अध्ययन करना सब जानते हैं, पर क्या अध्ययन करना चाहिए यह कोई नहीं जानता।
किसी पुरुष या महिला के पालन-पोषण की आज़माइश तो एक झगड़े में उनके बर्ताव से होती है। जब सब ठीक चल रहा हो तब अच्छा बर्ताव तो कोई भी कर सकता है।
जार्ज बर्नार्ड शा


very nice post and good news