जीवन के श्लोक भाग-1 | Shlokas for Life with Hindi meaning

जीवन के श्लोक भाग-1 | Shlokas for Life with Hindi meaning 

चिन्ताज्वरो मनुष्याणां क्षुधां निद्रां बलं हरेत् ।
रूपमुत्साहबुध्दिं श्रीं जीवितं च न संशयः ॥

“चिंता” स्वरुप ज्वर (बुखार) भूख, नींद, बल, सौंदर्य, उत्साह, बुद्धि, समृद्धि और स्वयं जीवन को भी हर लेता है ।

आदित्यः सोमो भौमश्च तथा बुध बृहस्पतिः ।
भार्गवः शनैश्चरश्चैव एते सप्त दिनाधिपाः ॥

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, और शनि – ये सात सप्ताह के दिनों के क्रमशः अधिपति हैं ।

संपत्सरस्वती सत्यं सन्तानं सदनुग्रहः ।
सत्ता सुकृत सम्भारः सकाराः सप्त दुर्लभाः ॥

संपत्ति, सरस्वती, सत्य, संतान, सज्जन कृपा, सत्ता, और सत्कृत्य की सामग्री – ये सात ‘स’ कार दुर्लभ हैं ।

मत्तः प्रमत्तः उन्मत्तः श्रान्तः क्रुद्धः बुभुक्षितः ।
त्वरमाणश्च लुब्धश्च भीतः कामी च ते दश ॥

मद्य पीया हुआ, असावध, उन्मत्त, थका हुआ, क्रोधी, डरपोक, भूखा, त्वरित, लोभी, और विषयलंपट – ये दस धर्म को नहीं जानते (अर्थात् उनसे संबंध नहीं रखना चाहिए) ।

आयु र्वित्तं गृहच्छिद्रं मन्त्रमौषध मैथुने ।
दानं मानापमानौ च नव गोप्यानि कारयेत् ॥

आयुष्य, वित्त, गृहछिद्र, मंत्र, औषध, मैथुन, दान, मान, और अपमान – ये नौ बातें गुप्त रखनी चाहिए ।

उद्योगः कलहः कण्डू र्मद्यं द्यूतं च मैथुनम् ।
आहारो व्यसनं निद्रा सेवनात् विवर्धते ॥

उद्योग, कलह, खुजली, मद्य, मैथुन, आहार, व्यसन, द्यूत, और निद्रा, सेवन करने से बढते हैं ।

पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा शिरस्तथा ।
मनसा वचसा दृष्टया प्रणामोऽष्टाङ्गमुच्यते ॥

हाथ, पैर, घूटने, छाती, मस्तक, मन, वचन, और दृष्टि इन आठ अंगों से किया हुआ प्रणाम अष्टांग नमस्कार कहा जाता है ।

शृङ्गार हास्य करुणा रौद्र वीर भयानकाः ।
बीभत्साद्भुतं संज्ञौ चेत्यष्टौ नाट्ये रसाः स्मृताः ॥

शृंगार, हास्य, करुणा, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, और अद्भुत – ये आठ नाट्यरस हैं ।

रति र्हासश्च शोकश्च क्रोधोत्साहौ भयं तथा ।
जुगुप्सा विस्मयश्चेति स्थायीभावाः प्रकीर्तिताः ॥

रति, हास, शोक, उत्साह, क्रोध, भय, निंदा, विस्मय – ये आठ स्थायीभाव माने गये हैं ।

गोभिर्विप्रैः च वेदैश्च सतीभिः सत्यवादिभिः
अलुब्धै र्दानशीलैश्च सप्तभि र्धार्यते मही ॥

गाय, ब्राह्मण, वेद, सती स्त्री, सत्यवादी इन्सान, निर्लोभी, और दानी – इन सात की वजह से पृथ्वी टिकी हुई है ।

शुचित्वं त्यागिता शौर्यं सामान्यं सुखदुःखयोः ।
दाक्षिण्यं चानुरक्तिश्च सत्यता च सुहृद्गुणाः ॥

प्रामाणिकता, औदार्य, शौर्य, सुख-दुःख में समरस होना, दक्षता, प्रेम, और सत्यता – ये मित्र के सात गुण हैं ।

रसो रुधिरं मांसश्च मेदो मज्जास्थिरेतसः ।
सप्त धातव इमे प्रोक्ताः सर्व देह समाश्रिताः ॥

रस, खून, मांस, मेद, मज्जा, अस्थि, और शुक्र – ये सात प्रकार के धातु शरीर में होते हैं ।

अग्निदो गरदश्वैव शस्त्रपाणि र्धनापहा ।
क्षेत्रदार हरश्चैव षडेत आततायिनः ॥

घर जलानेवाला, झहर देनेवाला, शस्त्र लेकर मारने आनेवाला, धन लूंटनेवाला, स्त्री हरण करनेवाला, खेत/जागीर हरनेवाला – ये सब आततायी हैं ।

मौनं कालविलम्बश्च प्रयाणं भूमिदर्शनम् ।
भुकुट्यन्य मुखी वार्ता नकाराः षड्विधाः स्मृताः ॥

मौन, विलंब, चले जाना, नीचे देखना, भँवर चढाना, और विषयांतर करना, ये छे नकार के तरीकें हैं ।

बह्वाशी स्वल्पसंतुष्टः सुनिद्रः शीघ्रचेतनः ।
प्रभु भक्तश्च शूरश्च ज्ञातव्याः षट् शुनो गुणाः ॥

खूब खाना, कम में संतुष्ट होना, गहरा सोना, सदा जाग्रत, स्वामी भक्त, और शौर्य – ये छे श्वान (कूत्ते) के गुन हैं ।

मेधावी वाक्पटुः धीरो लघुहस्तो जितेन्द्रियः ।
परशास्त्रपरिज्ञाता एष लेखक उच्यते ॥

बुद्धिमान, वाक्पटु, धीर, शीघ्र लिखनेवाला, संयमी, और अन्य शास्त्रों को पूर्णरुप से जाननेवाले को लेखक कहते हैं ।

भक्ष्यं भोज्यं च पेयम् च लेह्यं चोष्यं च पिच्छिलम् ।
इति भेदाः षडन्नस्य मधुराद्याश्च षड्रसाः ॥

अन्न के छे मधुर रसों का विभाजन इस प्रकार है – चबाने योग्य, निगलने योग्य, पीने योग्य, चाटने योग्य, चूसने योग्य, और चिकना ।

श्रीरागोऽथ वसन्तश्च भैरवः पञ्चमस्तथा ।
मेघरागो बृहन्नाटो षडेते पुरुषाः स्मृताः ॥

श्री, वसंत, भैरव, पंचम, मेघमल्हार, और बृहन्नाट ये गायन शास्त्र के छे पुरुष राग हैं ।

सुस्वरं सुरसं चैव सुरागं मधुराक्षरं ।
सालङ्कारं सप्रमाणं षड्विधं गानलक्षणम् ॥

स्वरयुक्त, रसयुक्त, रागसभर, मधुर शब्दोंवाला, अलंकारयुक्त और सप्रमाण, ऐसे गाने में छे लक्षण होने चाहिए ।

सीदन्ति सन्तः विलसन्त्यसन्तः पुत्रा म्रियन्ते जनकश्चिरायुः ।
परेषु मैत्री स्वजनेषु वैरं पश्यन्तु लोक कालि कौतुकानि ॥

संत दुःखी और असंत विलास करे, पुत्र अल्पायु और पिता दीर्घायु, परायों से मैत्री पर स्वजनों से बैर, जगत में कलि के ऐसे कौतुक होते हैं ।

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Shweta Pratap

I am a defense geek

One thought on “जीवन के श्लोक भाग-1 | Shlokas for Life with Hindi meaning

  • January 18, 2017 at 4:33 pm
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    Great really awesome what a heart touching slokas and meanings in Hindi. “”Mujhe Garv hai ki hamare desh Mei aisi Bhi anmol partibha waley log hain . Wah ati Anand.

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