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मुसलमानों में क्यों उपेक्षित थे डा कलाम !!!
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मुसलमानों में क्यों उपेक्षित थे डा कलाम !!!

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सम्पूर्ण भारत के हिन्दुओं में डा कलाम का जो प्रभाव था वह बेजोड़ था | रहीम, रसखान की परंपरा के संत श्री कलाम को देश ने सर आँखों पर बिठाया था | अभी अचानक ही वह अपना भौतिक शरीर छोड़ कर पंचतत्व में विलीन हो गए | हर आँख नम हो गई, हर ह्रदय में भाव उमड़ गए और हर वह सर झुक गए जो भारत माता के चरणों में झुक जाते हैं | फिर चाहे मोदी जी हों, स्वामी रामदेव या फिर ९६ साल के मार्शल अर्जन सिंह ….मानों पूरा देश रो पड़ा |

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जब मोदी जी ने कहा की हमने अपना मार्गदर्शक खो दिया तो लगा जैसे ये देश अनाथ हो गया | धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चला गया | मै खुद उन हज़ारों लोगो में रहा जो लाइन लगा कर १० राजाजी मार्ग नई दिल्ली पर श्री कलम साहब के पार्थिव शरीर को अंतिम बार दर्शन करने दौड़ते हुए पंहुचा …..मानों किसी देवतत्त्व के स्वर्गारोहण का समय हो |

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धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चला गया

परन्तु एक बात जो सर्वथा खटक रही थी की कुछ दिनों पहले तक इफ्तारों की राजनीति करने वाली मुस्लिम-सेकुलरों की वर्णसंकर जमात कलाम साहब को श्रद्धांजलि देने में सर्वथा गायब रही | कोई भी जालीदार टोपी वाला उनको श्रद्धांजलि देने नहीं पंहुचा और देश के तीन टुकड़े कराने की ताकत रखने वाली ये तथाकथित अल्पसंख्यक जमात अपनी श्रद्धा याकूब मेमन को बचने में प्रगट करती रही |

इतिहास गवाह है की इस देश के मुसलमानों ने रहीम और रसखान को एक काफिर ही माना और उन्हें अपने इस्लामिक पहचान से दूर रखने की कोशिश किया | ठीक वैसे ही डॉ कलाम को भी मुस्लिम जमात एक काफिर ही मानती थी एवं उनके द्वारा किये गए देश सेवा को बस एक गैर ईस्लामिक कृत्य मानकर उन्हें हासिये पर रखा गया |

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Kalam @RSS Headquarter Nagpur

उनके मरने के बाद जालीदार टोपी धारकों के झंडाबरदारों ने उन्हें सच्चा मुसलमान नहीं माना क्यों की वो गीता पढ़ते थे | मरते वक्त उनके पास दाढ़ी भी नहीं थी तो इस्लाम के अनुसार उन्हें जन्नत भी नहीं नसीब होगी क्यों की क़यामत के दिन अल्लाह कब्रों से मुस्लिमों की दाढ़ी ही खींच कर जन्नत में ले जाता है और यदि दाढ़ी नहीं रहेगी तो वो इंसान कब्र में ही छूट जाएगा |

परन्तु मेरा विश्वास है की कलम साहब को मोक्ष जरुर मिला होगा | वास्तव में इन दोगले Indian मुसलमानों को कलाम साहब से चिढ होने के पर्याप्त वजह थी |

जालीदार टोपी की राजनीती से दूर थे कलाम साहब !

A.P.J. Abdul Kalam with Shivakumara Swamiji of Siddaganga Math in Tumkur
A.P.J. Abdul Kalam with Shivakumara Swamiji of Siddaganga Math in Tumkur

रामेश्वरम के धनुषकोडी में पैदा हुए कलाम साहब का बचपन हिन्दू आस्था वाले तीर्थयात्रियों में बीता | एक छोटे से द्वीप तक आने वाले धर्मनिष्ठ लोग…. मंदिर….पक्षी लक्षमण शास्त्री…….!!! घर का एक शुद्ध वातावरण था और कलाम साहब हिन्दू धर्म के महत्त्व को समझते थे |

कलाम साहब ने आजीवन स्वयं को मुसलमान सिद्ध करके कोई फायदा उठाने की कोशिश नहीं किया एवं मुसलमानों के मजलिस और नमाज की राजनीति से दूर रहे |

सरस्वती माता के वीणा वादक पुत्र-

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कलाम साहब राष्ट्रपति भवन में सरस्वती माता के सामने वीणा वादन करते थे और उपनिषदों में वर्णित “पर्णकुटी” को उन्होंने अपने राष्ट्रपति भवन के गर्दन में बनवाया था जहाँ वो रोज एक या दो घंटे बैठकर चिंतन और मनन करते थे |

शाकाहारी और ब्रम्हचारी जीवन-

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कलाम साहब ब्रम्हचारी और शाकाहारी व्यक्ति थे | वो जीव हत्या को पाप समझते थे और यह विचार भारतीय मुसलमानों को नागवार गुजरती थी |

कुल मिलकर जिस दिन कलाम साहब दफनाये गए उस दिन इस देश की गद्दार कौम के जालीदार टोपियों ने याकूब मेमन के लिए फातिहा पढ़ा और जन्नत नशीं होने के लिए सजदा किया | कलाम साहब के हिस्से तो बस काफिरों का प्यार आया |

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Shivesh Pratap

Hello, My name is Shivesh Pratap. I am an Author, IIM Calcutta Alumnus, Management Consultant & Literature Enthusiast. The aim of my website ShiveshPratap.com is to spread the positivity among people by the good ideas, motivational thoughts, Sanskrit shlokas. Hope you love to visit this website!

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