नारी पर संस्कृत श्लोक | Sanskrit Shlokas for Nari with hindi meaning
नारी पर संस्कृत श्लोक | Sanskrit Shlokas for Nari with hindi meaning
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।
जिस कुल में नारियों कि पूजा, अर्थात सत्कार होता हैं, उस कुल में दिव्यगुण, दिव्य भोग और उत्तम संतान होते हैं और जिस कुल में स्त्रियों कि पूजा नहीं होती, वहां जानो उनकी सब क्रिया निष्फल हैं।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।
अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।
यस्य माता गृहे नास्ति, तस्य माता हरितकी।
अर्थात, हरीतकी (हरड़) मनुष्यों की माता के समान हित करने वाली होती है।
माता गुरुतरा भूमेरू।
अर्थात, माता इस भूमि से कहीं अधिक भारी होती हैं।
नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।।
मातृ देवो भवः।
अर्थात, माता देवताओं से भी बढ़कर होती है।
मातृमान् पितृमानाचार्यवान पुरूषो वेदः।
‘प्रशस्ता धार्मिकी विदुषी माता विद्यते यस्य स मातृमान।
निज माता और सासु ये, पाँचों मातृ समान।।
सेवनिया है सभी को वहा महा महिमामयी’।।

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